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बीकानेर में सरपंच प्रत्याशी का अनूठा कदम, 500 रुपये के स्टाम्प पेपर पर जारी किया चुनावी घोषणा पत्र

08 Oct 2026, 08:57 AM · 17 views · 1 min readबीकानेर में सरपंच प्रत्याशी का अनूठा कदम, 500 रुपये के स्टाम्प पेपर पर जारी किया चुनावी घोषणा पत्र

बीकानेर जिले की आडूरी पंचायत में सरपंच उम्मीदवार शिवलाल मेघवाल ने मतदाताओं का भरोसा जीतने के लिए 500 रुपये के स्टाम्प पेपर पर 13 वादे दर्ज कर चुनावी घोषणा पत्र सार्वजनिक किया है।

राजस्थान में पंचायत चुनावों की सरगर्मियों के बीच बीकानेर जिले से एक बेहद दिलचस्प और अनोखा मामला सामने आया है। आम तौर पर चुनावों में प्रत्याशी हाथ जोड़कर वादे करते हैं या कागज के पर्चों पर दावे छपवाते हैं, लेकिन यहां एक उम्मीदवार ने मतदाताओं को भरोसा दिलाने के लिए कानूनी रास्ता चुना है। जिले के पूगल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत आडूरी में सरपंच पद के उम्मीदवार शिवलाल मेघवाल ने 500 रुपये के स्टाम्प पेपर पर अपना घोषणा पत्र तैयार करवाया है। प्रत्याशी के इस कदम ने पूरे इलाके में चुनावी चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है। शिवलाल मेघवाल ने इस स्टाम्प पेपर के माध्यम से गांव के विकास से जुड़े कुल 13 अहम कार्यों को पूरा करने की सार्वजनिक प्रतिबद्धता जताई है। उनका कहना है कि वे चुने जाने के बाद पंचायत की बुनियादी समस्याओं को दूर करने को प्राथमिकता देंगे। इस घोषणा पत्र की सबसे खास बात इसमें तय की गई समय सीमा और शर्तें हैं। उम्मीदवार ने लिखित रूप से स्पष्ट किया है कि यदि वे चुनाव जीतने के बाद आगामी दो वर्षों में इन 13 कार्यों को धरातल पर नहीं उतार पाए, तो वे पद पर बने नहीं रहेंगे।
स्टाम्प पेपर में उल्लेख किया गया है कि दो साल की अवधि में वादे पूरे न होने की स्थिति में वह तुरंत सरपंच पद से इस्तीफा सौंप देंगे। किसी ग्रामीण जनप्रतिनिधि द्वारा खुद के लिए इस तरह की डेडलाइन तय करना इलाके में कौतूहल का विषय बना हुआ है। इसके अलावा घोषणा पत्र में पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का संकल्प भी दोहराया गया है। शिवलाल ने लिखा है कि यदि उनके पूरे कार्यकाल के दौरान पंचायत के किसी भी काम में एक रुपये का भी गबन या घोटाला साबित होता है, तो वे बिना देरी किए त्यागपत्र दे देंगे। ग्रामीणों के बीच इस अनोखे घोषणा पत्र की प्रतियां तेजी से चर्चा में आ गई हैं। चौपालों से लेकर सोशल मीडिया तक लोग प्रत्याशी के इस साहसी और अनूठे फैसले की सराहना करते हुए इसे चुनावी पारदर्शिता की अच्छी मिसाल बता रहे हैं।

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