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भरतपुर कुआं कांड: 5 करोड़ की दवाओं के अवैध सिंडिकेट का मास्टरमाइंड आगरा से गिरफ्तार, पांच आरोपी शिकंजे में

01 Oct 2026, 10:57 PM · 93 views · 1 min readभरतपुर कुआं कांड: 5 करोड़ की दवाओं के अवैध सिंडिकेट का मास्टरमाइंड आगरा से गिरफ्तार, पांच आरोपी शिकंजे में

भरतपुर के सूखे कुएं में मिली करीब 5 करोड़ रुपये की दवाओं के मामले में यूपी-राजस्थान औषधि विभाग की कार्रवाई में सरगना हिमांशु अग्रवाल सहित पांच आरोपियों को दबोचा गया है।

भरतपुर जिले की बयाना तहसील स्थित एक गांव में सूखे कुएं से भारी मात्रा में दवाइयां बरामद होने के मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। इस पूरे अवैध सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार आगरा निवासी दवा कारोबारी हिमांशु अग्रवाल पकड़ा गया है। खटनावाली गांव के एक वीरान कुएं से विभिन्न जीवनरक्षक दवाओं के 274 कार्टन बरामद किए गए थे। बरामद दवाओं की अनुमानित कीमत लगभग पांच करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें डायबिटीज, एलर्जी और हृदय रोग से जुड़ी कई प्रमुख दवाइयां शामिल हैं। राजस्थान ड्रग विभाग द्वारा जानकारी साझा किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश के औषधि विभाग ने आगरा के मलपुरा क्षेत्र में दबिश दी। वहां एक बाड़े में बड़े पैमाने पर दवाइयों का अवैध स्टॉक पाया गया, जिसके भंडारण या क्रय-विक्रय का कोई भी वैध लाइसेंस मौजूद नहीं था। पुलिस और ड्रग विभाग ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी हिमांशु अग्रवाल के साथ इकरार, शामिन, आशीष और सलुआ उर्फ मुकीम को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में शामिल अन्य कड़ियों की तलाश अभी जारी है।
जांच पड़ताल के दौरान आरोपी मुकीम के मोबाइल से कुछ संदिग्ध वीडियो भी बरामद हुए हैं। इनमें 27 सितंबर की रात नदी किनारे दवाओं पर डीजल उड़ेलकर उन्हें नष्ट करने के दृश्य सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी हिमांशु अग्रवाल पर पहले भी नकली दवाओं की आपूर्ति के आरोप रहे हैं और वह पूर्व में पुडुचेरी में सप्लाई के नेटवर्क से भी जुड़ा था। वह पहले भी कानूनी शिकंजे से बचने के लिए एक करोड़ रुपये की रिश्वत पेशकश के आरोप में जेल जा चुका है। जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि उत्तर प्रदेश में औषधि विभाग की सख्ती बढ़ने के कारण पकड़े जाने के डर से दवाओं की यह बड़ी खेप राजस्थान के सीमावर्ती इलाके में लाकर छिपा दी गई थी। ड्रग विभाग के अधिकारी अब इस बात की पड़ताल में जुटे हैं कि कुएं में मिली एक्सपायर्ड दवाओं के लेबल या तारीख बदलकर उन्हें दोबारा बाजार में बेचने की साजिश तो नहीं थी, या फिर कंपनियों से क्लेम लेने के बाद उन्हें नए सिरे से खपाने की तैयारी चल रही थी।

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