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बारां में 92.75 लाख की साइबर ठगी: डॉक्टर और इंजीनियर समेत चार आरोपी गिरफ्तार, नेपाल तक जुड़े थे तार

01 Oct 2026, 11:05 PM · 5 views · 1 min readबारां में 92.75 लाख की साइबर ठगी: डॉक्टर और इंजीनियर समेत चार आरोपी गिरफ्तार, नेपाल तक जुड़े थे तार

राजस्थान के बारां जिले में व्यापारी के साथ हुई 92.75 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी के मामले में पुलिस ने डॉक्टर और कंप्यूटर इंजीनियर सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों के लेनदेन का खुलासा हुआ है।

राजस्थान के बारां जिले में पुलिस ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी मामले का पर्दाफाश करते हुए चार नए आरोपियों को दबोच लिया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक डॉक्टर, एक कंप्यूटर इंजीनियर और एक फिजियोथेरेपिस्ट भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में अब तक कुल 10 आरोपियों को कानून के शिकंजे में लिया जा चुका है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासु ने मामले की जानकारी साझा करते हुए बताया कि बारां के स्थानीय व्यापारी विष्णु गालव से ट्रेडिंग एप्लीकेशन में निवेश के नाम पर 92.75 लाख रुपये की ठगी की गई थी। ठगों ने पीड़ित को भारी मुनाفه का लालच देकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया था। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि पीड़ित के खातों से 17.51 लाख रुपये 'आरपी केमिकल्स' नाम की फर्म के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। अहमदाबाद में यह फर्म चलाने वाले फिजियोथेरेपिस्ट राज अतुल भाई पडसाला को पुलिस ने सबसे पहले पकड़ा, जिसने कमीशन के लालच में अपना खाता उपलब्ध कराया था। पूछताछ में पता चला कि नवंबर 2025 में राज की मुलाकात कंप्यूटर इंजीनियर याज्ञनिक अशोक भाई रामाणी से हुई थी। याज्ञनिक ने उसे बैंक खाता किराए पर देने के एवज में 2 से 3 प्रतिशत कमीशन और प्रतिदिन एक लाख रुपये देने का प्रलोभन दिया था।
इस लालच में आकर फिजियोथेरेपिस्ट ने अपनी फर्म का एटीएम, चेकबुक और बैंक से जुड़ा मोबाइल नंबर इंजीनियर को सौंप दिया था। इसके बाद याज्ञनिक ने राजकोट के रहने वाले डॉक्टर जयदीप कुमार और लक्ष्मण जयंतीलाल वाघेला के साथ मिलकर इन बैंकिंग सामग्रियों को आगे बढ़ाया। पुलिस के मुताबिक, इंजीनियर और अन्य सहयोगी फ्लाइट के जरिए दिल्ली, उत्तराखंड के रुद्रपुर और फिर नेपाल सीमा पार कर धनगढ़ी एवं काठमांडू पहुंचे थे। नेपाल में उनकी मुलाकात सरफराज नाम के मुख्य साइबर ठग से हुई थी, जिसे ये बैंक किट और सिम कार्ड सौंपे गए थे। आरंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस किराए के बैंक खाते के जरिए मात्र 10 से 15 दिनों के भीतर 3 से 4 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन किया गया था। इस नेटवर्क का दायरा काफी बड़ा है और कई अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए अब तक 20 लाख रुपये होल्ड करवा दिए हैं और 10 लाख रुपये पीड़ित व्यापारी को वापस दिलवाए हैं। साइबर सेल इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।

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