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मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दिल्ली में बड़ा विरोध प्रदर्शन: 3,000 से अधिक हिरासत में, सीजेपी नेता और कई विपक्षी चेहरे रोके गए

10 Oct 2026, 04:57 AM · 18 views · 1 min readमुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दिल्ली में बड़ा विरोध प्रदर्शन: 3,000 से अधिक हिरासत में, सीजेपी नेता और कई विपक्षी चेहरे रोके गए

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में व्यापक प्रदर्शन हुआ। पुलिस ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके, वामपंथी नेताओं और कार्यकर्ताओं समेत 3,000 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को वापस लेने की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखा गया। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), वामपंथी दलों और कई छात्र संगठनों के इस साझा आह्वान पर पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया और इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया। दिल्ली पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, शहर भर से 3,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। इनमें से अकेले जंतर-मंतर और निकटवर्ती क्षेत्रों से लगभग 500 लोगों को बसों में भरकर अलग-अलग स्थानों पर भेजा गया। सुरक्षा कारणों और पूर्व अनुमति न होने का हवाला देकर प्रशासन ने सभा करने से इनकार कर दिया था। मुंबई से विमान के जरिए पहुंचे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हवाई अड्डे पर उतरते ही पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया। इसके बाद संगठन ने कहा कि नेताओं की अनुपस्थिति में भी युवाओं का आंदोलन जारी रहेगा और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कमान संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे संभालेंगे। दूसरी तरफ, हरियाणा के गुरुग्राम में रह रहे यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी संयुक्त पुलिस कार्रवाई में हिरासत में लेकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। वहीं आईसा अध्यक्ष नेहा बोर्रा, जिन्होंने जंतर-मंतर पर पाबंदियों के बाद दिल्ली हाट में जुटने की बात कही थी, उन्हें भाकपा (माले) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के साथ हिरासत में ले लिया गया।
वामपंथी दलों के शीर्ष नेताओं को भी राजधानी में रोका गया। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, पूर्व वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार और वरिष्ठ नेत्री बृंदा करात को पुलिस ने आगे नहीं बढ़ने दिया। इस बीच राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम ने नांगलोई स्टेडियम में पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया। तृणमूल कांग्रेस की नेता और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जंतर-मंतर जाने की इजाजत नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने साउथ एवेन्यू में सांसदों के फ्लैट के निकट ही विरोध दर्ज कराया। इसी तरह का असर अन्य राज्यों में भी दिखा, जहां चंडीगढ़ में प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया को पकड़ा गया और चेन्नई में सचिवालय की ओर बढ़ रहे 100 से अधिक वामपंथी छात्र कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे अधिवक्ताओं, खासकर महिला वकीलों को रोके जाने और कथित बल प्रयोग पर गंभीर चिंता जताई है। बार एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए सभी हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा और तत्काल रिहाई सुनिश्चित कराने की मांग की है। आंदोलन के मद्देनजर पूरी दिल्ली में आवागमन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रही। सुरक्षा के तहत 45 मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए, मध्य दिल्ली के कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट पर असर पड़ा और नई दिल्ली व हजरत निजामुद्दीन स्टेशनों पर आने-जाने वाली 250 से अधिक रेलगाड़ियां रद्द कर दी गईं, जिससे आम यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

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