
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सख्त पहरा, सीजेपी नेताओं और ममता बनर्जी समेत कई हिरासत में
10 Oct 2026, 04:49 AM · 33 views · 1 min read
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले दिल्ली में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया। अभिजीत दीपके, सौरव दास और ममता बनर्जी समेत कई प्रमुख चेहरों को हिरासत में लिया गया है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। पुलिस ने अनुमति न होने का हवाला देते हुए आयोजन स्थल जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में कड़ी नाकेबंदी कर दी और कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरते ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। दीपके ने पहले से तैयार एक वीडियो संदेश के जरिए जानकारी दी कि उनकी अनुपस्थिति में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कमान पार्टी के संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे संभालेंगे।
प्रदर्शन में शामिल होने जा रहीं पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को साउथ एवेन्यू के पास रोका गया, जिसके बाद वह सड़क किनारे धरने पर बैठ गईं। वहीं, माकपा नेता पिनाराई विजयन सहित वामपंथी नेताओं, आप नेता मनीष सिसोदिया और मुंबई में महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को भी हिरासत में लिए जाने की सूचना सामने आई।
इस मामले में सोशल मीडिया हस्तियों पर भी कार्रवाई देखने को मिली। यूट्यूबर ध्रुव राठी, कंटेंट क्रिएटर काव्या कर्नाटका और आईसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया। इधर, सीजेपी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने अपनी हिरासत के खिलाफ दिल्ली की साकेत अदालत में अर्जी दाखिल कर प्राथमिकी दर्ज करने की गुहार लगाई है।
सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के 40 हजार से अधिक जवानों को तैनात किया गया है। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड्स और स्पाइक स्ट्रिप्स लगाए गए हैं। साथ ही, दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास नियंत्रित किया गया है तथा नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन पहुंचने वाली कई एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द किया गया।
सीजेपी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के तहत बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं और करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। संगठन इसी आधार पर सीईसी के इस्तीफे की मांग कर रहा है। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे।
विपक्षी दलों ने नेताओं और कार्यकर्ताओं की धरपकड़ पर कड़ा ऐतराज जताया है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस सांसद शशि थरूर और राकांपा (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने सुरक्षा पाबंदियों को अलोकतांत्रिक और अघोषित आपातकाल जैसा करार दिया है।
दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ भाजपा ने इन प्रदर्शनों को अराजकता फैलाने का प्रयास बताया है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने बयान जारी कर आरोप लगाया कि विपक्षी गठबंधन और सीजेपी जैसे समूह देश में अस्थिरता का माहौल पैदा करने की होड़ में लगे हैं, जिसे जनता सफल नहीं होने देगी।
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