
दिल्ली में जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश मामला: कॉकरोच जनता पार्टी के तीन नेता एहतियातन हिरासत में
13 Oct 2026, 10:11 PM · 11 views · 1 min read
दिल्ली में जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रवेश करने और नारेबाजी करने के आरोप में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया है।
राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन प्रमुख नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक, इन नेताओं पर जंतर-मंतर क्षेत्र में बिना अनुमति के घुसने का आरोप लगाया गया है।
हिरासत में लिए गए नेताओं की पहचान सौरभ दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे के रूप में हुई है। यह कार्रवाई बुधवार यानी 14 अक्टूबर 2026 को सामने आई, जब पुलिस ने अनधिकृत प्रवेश को लेकर यह कदम उठाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन तीनों नेताओं को मंगलवार, 13 अक्टूबर की सुबह उस समय पकड़ा गया जब उन्होंने कथित तौर पर बैरिकेड्स पार कर लिए थे। यह विरोध प्रदर्शन स्थल हाल ही में प्रदर्शनों के लिए अधिकृत स्थल के रूप में डी-नोटिफाइड किया जा चुका है।
इन नेताओं पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी करने का भी आरोप है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन पर अनधिकृत प्रवेश, निषेधाज्ञा का उल्लंघन, शांति बांड तोड़ने और लोक सेवक के आधिकारिक कर्तव्यों में बाधा डालने जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि आशुतोष रांका और सौरभ दास ने पिछले शनिवार को राजधानी में हुए एक अन्य प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद एक साल तक शांति बनाए रखने के लिए एक बांड पर हस्ताक्षर किए थे।
सूत्रों का कहना है कि इन तीनों को बुधवार सुबह एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की स्पेशल कोर्ट (SEM) के समक्ष पेश किए जाने की संभावना है। हाल ही में CJP और अन्य संगठनों द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को एक आदेश जारी कर रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड को प्रदर्शनों के लिए निर्धारित किया था, जिसके बाद जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया था।
दूसरी ओर, CJP ने इस फैसले की आलोचना करते हुए तर्क दिया है कि राष्ट्रीय राजधानी के राजनीतिक केंद्र से प्रदर्शनों को दूर स्थानांतरित करने से सार्वजनिक असंतोष की दृश्यता कमजोर हो जाएगी।
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