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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विपक्ष के बीच क्यों बढ़ रहा है टकराव?

08 Oct 2026, 08:27 AM · 35 views · 1 min readमुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विपक्ष के बीच क्यों बढ़ रहा है टकराव?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली को लेकर विपक्ष लगातार सवाल खड़े कर रहा है। हाल ही में विपक्षी सांसदों ने निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक मार्च भी निकाला था।

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) और विपक्षी दलों के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीके को लेकर राजनीतिक दलों की तरफ से गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि आयोग के शीर्ष अधिकारियों का रवैया राजनीतिक दलों के प्रति असहयोगात्मक और कठोर होता जा रहा है। हाल ही में 6 अक्टूबर को लगभग 240 विपक्षी सांसदों ने दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग के दफ्तर की तरफ मार्च निकाला था। इन सांसदों की मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करने और उनका इस्तीफा मांगने की थी। हालांकि, पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद इन नेताओं ने सड़क पर ही धरना शुरू कर दिया था। दूसरी तरफ, निर्वाचन आयोग ने एक प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष रखा था। आयोग का कहना था कि शाम चार बजे तक किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि की तरफ से औपचारिक मुलाकात का कोई समय नहीं मांगा गया था। आयोग के मुताबिक, राहुल गांधी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपने की इच्छा जताई थी, लेकिन प्रोटोकॉल के तहत बैठक आयोग के परिसर में होनी चाहिए थी। विपक्ष का यह भी आरोप है कि कई मौकों पर उन्हें अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं ने दावा किया था कि अप्रैल 2026 में जब उनका एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला, तो मुख्य चुनाव आयुक्त ने कथित तौर पर उन्हें 'गेट लॉस्ट' यानी चले जाने को कहा था। टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने यह भी आरोप लगाया कि बैठकों के दौरान अन्य दो चुनाव आयुक्तों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जाता है।
बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जुलाई 2025 में हुई बैठक का अनुभव भी विपक्षी नेताओं के लिए सुखद नहीं रहा था। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उस बैठक को सौहार्दपूर्ण नहीं कहा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति में सुनने की क्षमता होनी चाहिए, जो उन्हें कम नजर आती है। राजनीतिक टकराव के अलावा, आयोग के भीतर की व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह Sandhu और विवेक Joshi ने पिछले कुछ महीनों में मतदाता सूचियों और फॉर्म-6 जैसे अहम मुद्दों पर कम से कम 14 बार अपने विरोध दर्ज कराए हैं। उनका कहना था कि कई फैसले उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए हैं। कानूनी ढांचे के अनुसार, निर्वाचन आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों मिलकर काम करते हैं और फैसले आम सहमति या बहुमत से होने चाहिए। जानकारों का मानना है कि इन तमाम घटनाओं के बाद यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या चुनाव आयोग एक सामूहिक संवैधानिक निकाय के रूप में काम कर रहा है या फिर फैसले एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द सिमटते जा रहे हैं।

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