
डिजिटल अरेस्ट: महाराष्ट्र में 3 करोड़ के साइबर फ्रॉड की जांच ने बचाई दिल्ली की बुजुर्ग महिला की गाढ़ी कमाई
14 Oct 2026, 11:01 PM · 9 views · 1 min read
महाराष्ट्र साइबर सेल ने छत्रपति संभाजीनगर में हुए 3 करोड़ रुपये के फ्रॉड की जांच के दौरान संदिग्ध लेन-देन का सुराग पाकर दिल्ली की एक बुजुर्ग महिला को बड़े वित्तीय नुकसान से बचा लिया।
महाराष्ट्र में डिजिटल अरेस्ट के जरिए 3 करोड़ रुपये की ठगी की पड़ताल कर रही पुलिस टीम की मुस्तैदी से दिल्ली की एक बुजुर्ग महिला साइबर जालसाजों के चंगुल से छूट सकीं। वित्तीय लेन-देन की पड़ताल के दौरान महाराष्ट्र साइबर ने समय रहते संदिग्ध गतिविधि पकड़ी और दिल्ली पुलिस को अलर्ट कर दिया।
पूरा मामला छत्रपति संभाजीनगर की 74 वर्षीय बुजुर्ग महिला से करीब 3 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़ा था। महाराष्ट्र साइबर की तकनीकी शाखा स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर धोखाधड़ी की रकम और बैंक खातों के जाल का विश्लेषण कर रही थी।
जांच टीम ने एक लेयर-1 म्यूल अकाउंट में ठगी के करीब 89 लाख रुपये का सुराग हासिल किया। इसी खाते की निगरानी करते हुए अधिकारियों को यूको बैंक से आरटीजीएस के जरिये 14 लाख रुपये का नया क्रेडिट दिखाई दिया। इस अचानक हुए लेन-देन ने तकनीकी टीम के कान खड़े कर दिए।
शक गहराने पर महाराष्ट्र साइबर ने इस खाते का बैकवर्ड ट्रेल निकाला और संबंधित बैंक को नोटिस भेजकर रकम भेजने वाले की केवाईसी जानकारी मांगी। बैंक से मिले ब्योरे से साफ हुआ कि पैसे भेजने वाली नई दिल्ली की एक बुजुर्ग महिला हैं और वे भी उसी नेटवर्क के डिजिटल अरेस्ट का शिकार हो रही हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र साइबर ने 13 अक्टूबर को तकनीकी इनपुट और बैंक रिकॉर्ड दिल्ली पुलिस से साझा किए। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस ने तुरंत महिला का पता लगाया और उन्हें आगे और पैसे भेजने से रोक लिया।
अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली की यह महिला तब तक जालसाजों को लगभग 27 लाख रुपये भेज चुकी थीं। हालांकि, समय पर हुई कार्रवाई से उनकी बाकी जमा पूंजी ठगों के हाथ जाने से बच गई। इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
महाराष्ट्र साइबर का कहना है कि रियल-टाइम वित्तीय विश्लेषण और राज्यों की पुलिस के बीच बेहतर तालमेल से चल रहे साइबर अपराधों को बीच में ही रोका जा सकता है। इससे मूल केस के साथ-साथ अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान करने में भी मदद मिलती है।
एजेंसी ने नागरिकों को आगाह किया है कि भारत में 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही मामले रफा-दफा करने के लिए पैसे मांगती है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।
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