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दिल्ली पुलिस ने किया 73 करोड़ रुपये के 'डिजिटल अरेस्ट' सिंडिकेट का भंडाफोड़, कंबोडिया से जुड़े तार, 11 गिरफ्तार

14 Oct 2026, 11:45 PM · 9 views · 1 min readदिल्ली पुलिस ने किया 73 करोड़ रुपये के 'डिजिटल अरेस्ट' सिंडिकेट का भंडाफोड़, कंबोडिया से जुड़े तार, 11 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट ने देशव्यापी डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 11 आरोपियों को दबोचा है। यह सिंडिकेट 73 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़ा है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अंतर्गत आने वाली इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने देश भर में 'डिजिटल अरेस्ट' और निवेश योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये की उगाही करने वाले एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह से जुड़े मामलों में लगभग 73 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। इस व्यापक अभियान के तहत पुलिस ने अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के तार दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों, विशेष रूप से कंबोडिया, हांगकांग और चीन में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े हुए हैं। आरोपी खुद को एनआईए, एटीएस या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते थे। जांच की शुरुआत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के 69 वर्षीय सेवानिवृत्त निदेशक व वैज्ञानिक प्रदीप कुमार दास की शिकायत के बाद हुई। दास ने आरोप लगाया था कि 14 अगस्त को फर्जी अधिकारियों ने उन्हें फोन कर आधार कार्ड के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग होने की बात कही और गिरफ्तारी का डर दिखाकर लगातार वीडियो निगरानी में रखा। इसके बाद जांच के नाम पर उनसे 1.25 करोड़ रुपये आरटीजीएस के माध्यम से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने बैंक खाते मुहैया कराने और फंड प्रबंधन से जुड़े नीरज कुमार मित्तल, कंवर पाल, सैफ अली खान, रणबीर, प्रभात राय और राजस्थान के हनुमानगढ़ निवासी अनिल सागू को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, अनिल सागू टेलीग्राम के जरिए विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में था और ठगी की रकम को यूएसडीटी (टीथर) जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर साथियों को कमीशन देता था।
जांच में मिले इनपुट्स के आधार पर पुलिस टीम ने दिल्ली के द्वारका सेक्टर-7 स्थित एक होटल में छापेमारी की। वहां से अनीश खान, मोहम्मद महफूजार रहमान, इजहार आलम, अल्ताफ हुसैन और इंतेखाब को पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, पकड़े जाने और आईपी एड्रेस ट्रेस होने के डर से ये लोग किसी भी ठिकाने पर 10 दिन से अधिक समय तक नहीं रुकते थे। डीसीपी (आईएफएसओ) गौरव त्यागी के मुताबिक, आरोपी बैंक खातों को संचालित करने के लिए 'एसएमएस टूल्स' नाम के एक विशेष एपीके का उपयोग कर रहे थे। यह एप्लिकेशन फोन पर आने वाले संदेशों और ओटीपी को स्वचालित रूप से विदेश में बैठे विदेशी हैंडलर्स को फॉरवर्ड कर देता था। इस समूह का मुख्य स्थानीय संचालक अनीश खान कथित तौर पर 5.5 प्रतिशत कमीशन पर काम कर रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क नेशनल साइबर रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 78 शिकायतों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इनमें विजयवाड़ा के एक 79 वर्षीय बुजुर्ग से डिजिटल अरेस्ट के जरिए 10.25 करोड़ रुपये ऐंठने और पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा देकर 21 लाख रुपये ठगने का मामला भी शामिल है। अधिकारियों ने आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन, व्हाट्सएप और टेलीग्राम चैट्स के साथ क्रिप्टो लेन-देन के डिजिटल सबूत जब्त किए हैं। जांच एजेंसियों ने म्यूल बैंक खातों की खरीद-फरोख्त के लिए इस्तेमाल हो रहे सात टेलीग्राम चैनलों की पहचान की है, जबकि हवाला नेटवर्क से जुड़े गुजरात के एक संदिग्ध की तलाश जारी है।

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