
दिल्ली में पाबंदियों और गिरफ्तारियों के बीच सीजेपी का फिर प्रदर्शन, कनॉट प्लेस में जुटने का आह्वान
15 Oct 2026, 09:37 PM · 5 views · 1 min read
दिल्ली पुलिस की सख्ती और प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शुक्रवार को कनॉट प्लेस में 'लहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन का ऐलान किया है।
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ता पुलिस की कड़ी पाबंदियों और नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद एक बार फिर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। संगठन ने शुक्रवार को राजधानी के व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में बड़े पैमाने पर जुटने का आह्वान किया है।
इस आंदोलन के अगुआ अभिजीत दिपके ने इस विरोध प्रदर्शन को 'लहरा दो तिरंगा' नाम दिया है। उन्होंने कहा है कि वह खुद भी गिरफ्तारी देने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने उन समर्थकों से, जो सुरक्षा घेराबंदी की वजह से कनॉट प्लेस नहीं पहुंच सकते, अपने-अपने स्थानों पर तिरंगा लहराकर विरोध दर्ज कराने की अपील की है।
प्रदर्शन को रोकने के लिए एक स्थानीय व्यापारी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर यातायात और व्यापार बाधित होने की आशंका जताई थी। हालांकि, अदालत ने इस कार्यक्रम पर रोक लगाने का कोई आदेश देने से इनकार कर दिया। वहीं, प्रशासन का कहना है कि सेंट्रल पार्क विरोध प्रदर्शनों के लिए अधिकृत स्थल नहीं है।
इससे पहले पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की आधिकारिक सूची से हटा दिया था और प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान या बुराड़ी जाने का विकल्प दिया था। संगठन का आरोप है कि सत्ता के केंद्र से दूर भेजकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। इसी के विरोध में मंगलवार को जंतर-मंतर पहुंचे सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लेकर पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
सीजेपी का यह आंदोलन मतदाता सूची के पुनरीक्षण यानी 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (एसआईआर) के विरोध पर केंद्रित है। आंदोलनकारियों का दावा है कि इस प्रक्रिया से करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है, हालांकि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार इन आरोपों का लगातार खंडन कर रहे हैं।
इस युवा आंदोलन की शुरुआत मई के महीने में हुई थी, जब बेरोजगारी से जुड़ी एक टिप्पणी को प्रतीक बनाते हुए दिपके ने इसे सोशल मीडिया से सड़कों तक फैलाया। इसके बाद परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर भी संगठन ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए थे, जिसके चलते तत्कालीन शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था।
पिछले सप्ताह भी सीजेपी के प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और हवाईअड्डे से लेकर सड़कों तक कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। संगठन ने पुलिस की इस कार्रवाई की तुलना आपातकाल से की थी, जबकि पुलिस ने इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बताया।
सीजेपी के इस आंदोलन के साथ-साथ विपक्षी दल भी चुनाव आयोग के खिलाफ अलग से मोर्चा खोले हुए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी सांसदों ने भी मतदाता सूची के मुद्दे पर प्रदर्शन किए हैं। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी आरोपों को निराधार बताते हुए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता का बचाव किया है।
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